
अंबिकापुर/सरगुजा :– जिले में प्रस्तावित तारा कोल माइंस को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। सरगुजा विकास संघर्ष समिति से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कोल माइंस के लिए पेड़ों की कटाई और खदान को मंजूरी देने की प्रक्रिया का विरोध करते हुए सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कार्यकर्ताओं ने खनन परियोजना को मंजूरी देने से पहले इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का गंभीरता से आकलन कराने की मांग की है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरगुजा क्षेत्र में पहले से ही कोयला खनन गतिविधियों के चलते पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में नई कोल माइंस को मंजूरी देने से पहले क्षेत्र के जंगल, पेड़-पौधे, जलस्रोत, वन्यजीव और स्थानीय ग्रामीणों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए।
CSR कार्यों की जांच और ऑडिट की मांग
ज्ञापन के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबंधित कंपनी की ओर से CSR मद से कराए गए कार्यों की जांच और ऑडिट कराने की मांग भी उठाई। उनका आरोप है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन दावों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। कार्यकर्ताओं ने रोजगार से जुड़े आंकड़ों, स्थानीय लोगों को दिए गए रोजगार और उससे संबंधित प्रचार-प्रसार की भी जांच कराने की मांग की।
मंजूरी मिली तो आंदोलन की चेतावनी
कार्यकर्ताओं ने कहा कि तारा कोल माइंस को मंजूरी दिए जाने की स्थिति में कलेक्ट्रेट के बाहर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रभावित गांवों के लोगों के अधिकार और भविष्य से जुड़ा विषय भी है। उन्होंने कहा कि प्रभावित ग्रामीणों के साथ मिलकर वे आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे और मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही।
ज्ञापन सौंपने के दौरान सरगुजा विकास संघर्ष समिति के सामाजिक कार्यकर्ता सुजान बिंद और सुरेश राम बुनकर सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। दोनों ने तारा कोल माइंस की मंजूरी प्रक्रिया, पेड़ों की कटाई, पर्यावरणीय प्रभाव और CSR कार्यों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।





