
वित्तीय अधिकारों के विवाद के बीच कैसे निकले ₹40,300? पुराने आवेदन से उठे नए सवाल?
सूरजपुर :– सूरजपुर जिले में समग्र शिक्षा के तहत 40 हजार 300 रुपये के आहरण के मामले में अब एक नया दस्तावेज सामने आया है। इस दस्तावेज ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। तत्कालीन प्राचार्य द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को दिए गए लिखित आवेदन में तत्कालीन DDO चंद्रपाल कुशवाहा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदन के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब वित्तीय अधिकारों को लेकर पहले से विवाद था, तब आखिर समग्र शिक्षा की राशि का आहरण किस आधार पर किया गया।
मिले आवेदन के अनुसार तत्कालीन प्राचार्य ओम प्रकाश योगी ने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत में बताया था कि उनकी पदोन्नति के बाद उन्होंने 2 सितंबर 2025 को कार्यभार ग्रहण कर लिया था। इसके बावजूद विद्यालय के DDO चंद्रपाल कुशवाहा द्वारा वित्तीय अधिकार अपने पास रखे जाने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में कहा गया है कि इससे विद्यालय का प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्य प्रभावित हो रहा था।
प्राचार्य ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया 2025 में कि DDO चंद्रपाल कुशवाहा ने कथित रूप से कहा 5 से 7 हजार लग जाएंगे DDO प्रभार का। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया आडिट करा कर आपको पदभार दे दिया जाएगा लेकिन पद दिया नहीं गया।
ADPO पद पर सूरजपुर में पदस्थ होने के बावजूद वे DDO के समस्त वित्तीय अधिकार अपने पास रखे हुए थे। आवेदन में जिला शिक्षा अधिकारी से मार्गदर्शन देने, आवश्यक आदेश जारी करने तथा DDO का प्रभार किसी अन्य अधिकारी को सौंपने की मांग की गई थी।
इस विद्यालय में और कई और मामले हैं जो परत दर परत खुलते जा रहे?, बिना नियमानुसार किसी की लंबी छुट्टी हो, कही के टीचर को इस विद्यालय से पेमेंट करना?, और भी कई सवाल है जो समय आने पर और सही जानकारी के साथ आपके समकक्ष रखा जाएंगे…
बड़ा सवाल यह है कि जब वित्तीय अधिकारों को लेकर विभाग के पास पहले से लिखित शिकायत मौजूद थी, तब संबंधित राशि का आहरण किसके आदेश पर हुआ? क्या विभाग ने शिकायत के बावजूद वित्तीय प्रक्रिया की जांच की थी या नहीं? यदि शिकायत सही थी, तो फिर भुगतान की जवाबदेही किसकी बनती है?
यह भी जांच का विषय है कि समग्र शिक्षा की राशि के आहरण के दौरान सभी वित्तीय नियमों का पालन हुआ था या नहीं। यदि DDO के वित्तीय अधिकारों को लेकर पहले से विवाद था, तो क्या विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था की थी? या फिर उसी विवादित व्यवस्था के तहत राशि का आहरण किया गया? अब इन सभी बिंदुओं पर विभागीय जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
समग्र शिक्षा के 40,300 रुपये के आहरण का मामला अब केवल एक वित्तीय भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है। सामने आए इस आवेदन ने पूरे प्रकरण में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि आवेदन में लगाए गए आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही होगी और संबंधित पक्ष का जवाब भी आना बाकी है।





