
सूरजपुर/रामानुजनगर :– जिन नन्हे हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में अगर मुरूम की टोकरी नजर आए तो सवाल उठना लाजिमी है। सूरजपुर के रामानुजनगर विकासखंड के सराईपारा शासकीय माध्यमिक शाला से सामने आए एक वायरल वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वायरल वीडियो में कुछ बच्चे स्कूल परिसर में मुरूम ढोते और उसे फैलाने का काम करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में शिक्षक की मौजूदगी के दौरान बच्चों से इस तरह का काम कराए जाने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर स्कूल में बच्चों की पढ़ाई के बजाय उनसे श्रम जैसा काम क्यों कराया जा रहा था?
मामले की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने भी इसे गंभीरता से लिया है। विभागीय अधिकारी के मुताबिक, मीडिया के माध्यम से मामले की जानकारी मिली और वायरल वीडियो भी देखा गया है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बच्चों से इस तरह का काम कराया जाना पूरी तरह गलत है।
अधिकारी के अनुसार, शिक्षा समीक्षा बैठकों में कलेक्टर और एसडीएम स्तर से भी शिक्षकों और अधिकारियों को बच्चों से ऐसे कार्य नहीं कराने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद यदि स्कूल में बच्चों से मुरूम ढुलाई या अन्य श्रम कराया गया है, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच विकासखंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से कराई जा रही है। जांच के दौरान मौके के तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोष सामने आने पर संबंधितों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।
बड़ा सवाल :– इस स्कूल का उद्देश्य बच्चों के भविष्य की नींव मजबूत करना है, या मजदूर बनाना है?
अब बड़ा सवाल यही है—जहां बच्चों को भविष्य की नींव मजबूत करने के लिए भेजा जाता है, वहां उनके हाथों में किताब की जगह मुरूम क्यों थमा दी गई? जांच के बाद ही साफ होगा कि इस पूरे मामले में गलती किस स्तर पर हुई और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।





