
शिकायत पड़ी धूल खाती रही, SECL की जांच अब तक क्यों ठप? जमीन के बदले कथित फर्जी नौकरी के आरोपों ने प्रबंधन की कार्यशैली पर खड़े किए सवाल?..
बिश्रामपुर SECL :– बिश्रामपुर क्षेत्र में जमीन के बदले नौकरी से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कसकेला गांव निवासी वृद्ध घासीराम ने आरोप लगाया है कि उसकी पुश्तैनी एवं उसके नाम पर पंजीकृत भूमि के आधार पर भैयाथान निवासी विजय पैकरा ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर SECL में नौकरी प्राप्त कर ली। पीड़ित का दावा है कि जिस परिवार की भूमि के आधार पर रोजगार का लाभ लिया गया, उसकी आधिकारिक वंशावली में विजय पैकरा का नाम दर्ज नहीं है। इसके बावजूद कथित रूप से दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल कर ली गई।
घासीराम का कहना है कि वह लंबे समय से न्याय की उम्मीद में सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। उम्र के इस पड़ाव में भी उसे अपनी ही जमीन और अधिकार को साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उसका आरोप है कि एक असहाय वृद्ध की जमीन का कथित रूप से दुरुपयोग कर उससे उसका वैधानिक अधिकार छीन लिया गया, जबकि उसी जमीन के आधार पर किसी अन्य व्यक्ति को रोजगार का लाभ मिल गया।
मामले को लेकर घासीराम ने SECL बिश्रामपुर के महाप्रबंधक संजय सिंह को लिखित आवेदन देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की। पीड़ित का आरोप है कि शुरुआत में महाप्रबंधक ने कई दिनों तक आवेदन लेने से इनकार करते हुए उसे स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी। लेकिन जब वह लटोरी चौकी पहुंचा तो वहां से उसे बताया गया कि चूंकि मामला SECL में नौकरी और भूमि दस्तावेजों से जुड़ा है, इसलिए प्रारंभिक शिकायत पर कार्रवाई SECL प्रबंधन को ही करनी होगी। इसके बाद महाप्रबंधक ने आवेदन तो स्वीकार कर लिया, लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि आवेदन दिए जाने के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो जांच प्रारंभ हुई और न ही किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई की जानकारी दी गई।
घासीराम का आरोप है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच शुरू कर दी जाती, तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती थी। कार्रवाई में हो रही देरी से उसके मन में यह आशंका पैदा हो रही है कि कहीं प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा। हालांकि इस संबंध में SECL प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
उधर, कसकेला ग्राम पंचायत के सरपंच ने भी पीड़ित के आरोपों का समर्थन करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भूमि अभिलेख, पंजीयन दस्तावेज और वंशावली के तथ्यों के विपरीत किसी को नौकरी मिली है, तो यह केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं बल्कि पूरी भूमि अधिग्रहण एवं रोजगार व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
अब क्षेत्र की निगाहें SECL प्रबंधन और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला केवल एक कथित फर्जी नौकरी का नहीं रहेगा, बल्कि दस्तावेजों के सत्यापन, प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक उपक्रमों में पारदर्शिता की भी बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।



