
अंबिकापुर :– अंबिकापुर से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मासूम को एक्सपायर्ड Amikacin इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप के बाद सिद्धार्थ हॉस्पिटल की जांच में तीन एक्सपायरी इंजेक्शन मिलने से अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर फार्मेसी, दवा स्टॉक और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की। जांच के दौरान Amikacin 250 mg के तीन इंजेक्शन ऐसे मिले, जिनकी एक्सपायरी डेट 04-2026 दर्ज है। अब सवाल यह है कि एक्सपायरी डेट गुजरने के बाद भी ये इंजेक्शन अस्पताल के स्टॉक में कैसे मौजूद रहे?
मासूम को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप ने पहले ही स्वास्थ्य महकमे में हलचल बढ़ा दी थी। इसी मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम सिद्धार्थ हॉस्पिटल पहुंची और अस्पताल में दवाओं के रखरखाव से लेकर मेडिकल रिकॉर्ड तक की जांच की।
जांच के दौरान अस्पताल की फार्मेसी में Amikacin 250 mg के तीन इंजेक्शन पाए गए, जिन पर Expiry Date 04-2026 दर्ज थी। यानी निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद ये इंजेक्शन अस्पताल के स्टॉक में पाए गए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अस्पताल में एक्सपायरी दवाओं के स्टॉक की निगरानी कौन कर रहा था? एक्सपायरी डेट गुजरने के बाद इन इंजेक्शनों को स्टॉक से अलग क्यों नहीं किया गया? क्या अस्पताल में दवाओं के स्टॉक की नियमित जांच होती है या फिर रिकॉर्ड और स्टॉक की निगरानी महज कागजों तक सीमित है?
हालांकि, इन इंजेक्शनों का किसी मरीज के इलाज में इस्तेमाल हुआ या नहीं, यह स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जांच और मेडिकल रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल तीन एक्सपायरी इंजेक्शन मिलने की पुष्टि जांच के दौरान हुई है।
अब निगाह स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट में अगर लापरवाही सामने आती है तो अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। वहीं, इस पूरे मामले ने मरीजों की सुरक्षा और निजी अस्पतालों में दवाओं के रखरखाव की व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
जब मरीज अस्पताल पहुंचता है तो वह इलाज के लिए डॉक्टर और अस्पताल पर भरोसा करता है… ऐसे में अगर एक्सपायरी डेट पार कर चुकी दवाएं स्टॉक में ही मिलें, तो मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?…





