
सूरजपुर :– जिले के रामानुजनगर तहसील कार्यालय से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां तहसीलदार पर पद के दुरुपयोग और नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर एक फर्जी EWS प्रमाण पत्र जारी करने के गंभीर आरोप लगे हैं दिलचस्प बात यह है कि विवाद बढ़ने के बाद इस प्रमाण पत्र को निरस्त करने की बात भी सामने आ रही है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
दरअसल, रामानुजनगर निवासी अमन जायसवाल पिता अभय जायसवाल मूल रूप से कलार जाति से ताल्लुक रखते हैं, जो अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC के अंतर्गत आती है। आवेदक का पूर्व में ही 12 सितंबर 2022 को रामानुजनगर SDM कार्यालय द्वारा पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है नियमों के अनुसार EWS का लाभ उन सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिलता है, जो SC, ST या OBC आरक्षण के दायरे में नहीं आते हैं।
इसके बावजूद आरोप है कि नियमों को दरकिनार करते हुए EWS प्रमाण पत्र जारी कराया गया और इसी प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल कॉलेज कोरबा में एडमिशन लेने की प्रक्रिया की जा रही है, इस मामले में तहसीलदार रामानुजनगर मनहरन राठिया का कहना है कि आवेदक द्वारा आवेदन पत्र में स्वयं को अनारक्षित श्रेणी यानी सामान्य वर्ग का बताते हुए शपथ पत्र के साथ आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसके आधार पर EWS प्रमाण पत्र जारी किया गया।
लेकिन जब तहसीलदार को जानकारी मिली कि EWS प्रमाण पत्र कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बनवाया गया है और इसी प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल कॉलेज कोरबा में एडमिशन लिया जा रहा है, तो मेडिकल कॉलेज कोरबा को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया जा रहा है।
साथ ही आरोपी आवेदक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की बात भी तहसीलदार द्वारा कही गई है अब बड़ा सवाल यह है कि अगर आवेदक के पास पहले से OBC प्रमाण पत्र था, तो सामान्य वर्ग के आधार पर EWS प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ?
क्या कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर EWS प्रमाण पत्र बनवाया गया और अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो इस पूरे मामले में जिम्मेदार कौन है?
फिलहाल तहसीलदार ने जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है। अब जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।





