
अंबिकापुर :– जिस मामले में कर्मचारी की सेवा अवधि, वेतनमान, बकाया एवं परिणामी लाभ का विवाद सीधे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, उसी प्रकरण को लेकर 18 लाख रुपये के “फाइनल पेमेंट” की खबर प्रकाशित किए जाने पर अब विभाग ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। 16 अगस्त 2026 को प्रकाशित खबर में 18 लाख रुपये के भुगतान/वसूली को लेकर किए गए दावे को उप-संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, अंबिकापुर ने असत्य एवं भ्रामक बताया है।
विभाग की ओर से संचालनालय को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 18 लाख रुपये की वसूली अथवा अंतिम भुगतान को लेकर खबर में प्रस्तुत तथ्य सही नहीं हैं। विभाग का कहना है कि संबंधित कर्मचारी के मामले में कार्रवाई मनमाने तरीके से नहीं, बल्कि हाईकोर्ट के आदेश और संचालनालय के निर्देशों के आधार पर की गई है।
न्यायालय पहुंच चुके मामले में खबर का आधार क्या था?
Scan 17 Aug 2026
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पूरा प्रकरण न्यायालय के समक्ष जा चुका था और हाईकोर्ट का आदेश उपलब्ध था, तो फिर 18 लाख रुपये के “फाइनल पेमेंट” जैसी महत्वपूर्ण बात किस आधार पर प्रकाशित की गई?
विभागीय पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रकाशित खबर में उच्चाधिकारियों की अनुमति के बिना 18 लाख रुपये का अंतिम भुगतान किए जाने की बात कही गई, लेकिन इस दावे के साथ कार्यालयीन दस्तावेजों और शासन के पक्ष को सामने नहीं रखा गया।
विभाग ने संबंधित दस्तावेजों के साथ न्यायालय के आदेश की सत्यापित प्रति भी संचालनालय को भेजी है। यानी अब सवाल केवल खबर के प्रकाशन का नहीं, बल्कि उस खबर में किए गए दावे के दस्तावेजी आधार का भी है।
हाईकोर्ट का आदेश कुछ और, खबर में दावा कुछ और?
मामले में उपलब्ध विभागीय पक्ष के अनुसार हाईकोर्ट का आदेश कर्मचारी की सेवा अवधि को मान्य करते हुए वेतनमान, बकाया राशि और परिणामी लाभ दिए जाने से संबंधित है। ऐसे में इसे सीधे 18 लाख रुपये के “फाइनल पेमेंट” के रूप में प्रस्तुत करना सवालों के घेरे में आता है।
विभाग ने स्पष्ट तौर पर इस दावे को भ्रामक बताया है। ऐसे में अब इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही होगा कि हाईकोर्ट के आदेश के तहत वास्तविक रूप से कितनी राशि देय है, कितनी राशि का भुगतान हुआ है और विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई है।
अब दस्तावेज तय करेंगे सच
न्यायालय में चले मामले में आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा महत्व न्यायालय के आदेश और सरकारी रिकॉर्ड का होता है। इसलिए 18 लाख रुपये के भुगतान को लेकर प्रकाशित खबर पर विभाग की आपत्ति के बाद अब पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर दस्तावेजों और हाईकोर्ट के आदेश पर आधारित है।
फिलहाल विभाग ने 18 लाख रुपये के “फाइनल पेमेंट” संबंधी खबर को असत्य एवं भ्रामक बताते हुए अपना पक्ष रिकॉर्ड पर रख दिया है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि जब मामला न्यायालय में विचारित हो चुका था, तो बिना पूरे न्यायालयीन और विभागीय पक्ष को सामने रखे इतनी बड़ी भुगतान राशि का दावा आखिर किस आधार पर प्रकाशित किया गया?





