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तीन मरीज बेहोश, अस्पताल में डॉक्टर गायब! लखनपुर CHC की व्यवस्था पर गंभीर सवाल

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अंबिकापुर/लखनपुर। लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अपनी कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम केंवरी में आकाशीय बिजली गिरने से घायल हुए तीन लोगों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का आरोप है कि आपात स्थिति में कई बार कॉल करने के बावजूद 108 संजीवनी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद घायलों को निजी वाहन से लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां पहुंचने के दौरान भी उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल सकी।        दरअसल, ग्राम केंवरी में एक घर में तीन लोग काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक मौसम बदला और गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि इसी दौरान घर के अंदर ही वज्रपात हुआ, जिसकी चपेट में आकर तीनों लोग घायल हो गए। घटना के बाद परिजनों ने तत्काल 108 संजीवनी एंबुलेंस के लिए संपर्क किया, लेकिन कथित तौर पर उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई और अंबिकापुर से एंबुलेंस आने की बात कही गई। काफी इंतजार के बाद परिजनों ने निजी वाहन की व्यवस्था की और तीनों घायलों को लखनपुर CHC पहुंचाया।

    बेहोशी की हालत में पहुंचे मरीज, मौके पर डॉक्टर नहीं!

परिजनों के मुताबिक, जब तीनों घायल बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचे, उस समय मौके पर कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। अस्पताल में उस वक्त केवल एक स्टाफ नर्स के भरोसे मरीजों की देखभाल की जा रही थी। परिजनों का कहना है कि करीब आधे घंटे बाद ड्यूटी डॉक्टर अस्पताल पहुंचे, जिसके बाद घायलों का उपचार शुरू हो सका।

हालांकि उपचार के बाद तीनों घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है और वे खतरे से बाहर हैं। लेकिन इस घटना ने आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक नर्स के भरोसे अस्पताल? व्यवस्था पर सवाल

घटना के दौरान अस्पताल में स्टाफ की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे हैं। परिजनों का आरोप है कि जिस समय तीन गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार की जरूरत थी, उस समय केवल एक स्टाफ नर्स ही मौजूद थी। ऐसे में सवाल यह है कि आपातकालीन स्थिति में यदि एक साथ कई गंभीर मरीज अस्पताल पहुंच जाएं तो उनका उपचार किस व्यवस्था के तहत होगा?

      बीएमओ ने दी सफाई, कहा- रोस्टर के हिसाब से रहती हैं दो-दो नर्स

मामले में लखनपुर बीएमओ डॉ. ओपी प्रसाद ने अस्पताल प्रबंधन का पक्ष रखते हुए कहा कि ओपीडी के समय सभी डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं और आपातकालीन स्थिति में भी डॉक्टरों की व्यवस्था रहती है। यदि किसी समय कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं होता है तो दूसरे डॉक्टर मरीजों का उपचार कर लेते हैं।

108 एंबुलेंस को लेकर बीएमओ ने कहा कि अस्पताल में 108 की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन एंबुलेंस कहीं और गई होने के कारण संभवतः उस समय सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई।

स्टाफ नर्स की कमी के आरोप पर बीएमओ ने कहा कि रोस्टर के अनुसार प्रत्येक शिफ्ट में दो-दो स्टाफ नर्स की ड्यूटी रहती है। संभव है कि घटना के समय एक स्टाफ नर्स प्रसव संबंधी कार्य में व्यस्त रही हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई कर्मचारी अनुपस्थित रहता है तो उसके संबंध में जानकारी लिए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सीएमएचओ ने जांच और कार्रवाई की बात कही

मामले को लेकर सीएमएचओ पीएस मार्को ने जांच कर आवश्यक कार्रवाई की बात कही है। अब देखना होगा कि जांच में अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था, डॉक्टर की उपलब्धता, स्टाफ नर्स की ड्यूटी और 108 एंबुलेंस की स्थिति को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

बड़ा सवाल–आपात स्थिति में जिम्मेदारी किसकी?

यह घटना एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यदि किसी गंभीर मरीज को समय पर एंबुलेंस नहीं मिले और अस्पताल पहुंचने के बाद भी चिकित्सक उपलब्ध न हो तो ऐसी स्थिति में मरीज की जान पर बन सकती है।

सवाल सिर्फ तीन घायलों का नहीं, बल्कि उन तमाम मरीजों का है जो आपात स्थिति में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर भरोसा करके पहुंचते हैं। सरकार लगातार ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आने वाली ऐसी घटनाएं व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े करती हैं।

फिलहाल तीनों घायल खतरे से बाहर हैं, लेकिन लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन व्यवस्था को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है। अब लोगों की नजर सीएमएचओ की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर है।

Fareed Khan

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