
उदयपुर/बतौली सरगुजा जिले के ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में मलेरिया के मामलों में लगातार बढ़ोतरी सामने आ रही है। अब तक 39 मरीज प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (PF) पॉजिटिव पाए गए हैं। 26 जुलाई तक जहां 31 मामले सामने आए थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 39 हो गई है। जिले में संक्रमण के मामले 6 मई से सामने आ रहे हैं।
मलेरिया से प्रभावित गांवों में मतरिंगा, खर्रानगर, मुसर डांड, मुकना पहाड़, बारो पहाड़, बकोई और सेमी घोघरा प्रमुख रूप से शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक प्रभावित मरीजों में बड़ी संख्या पहाड़ी कोरवा और पण्डो समुदाय से है। संक्रमित मरीजों में करीब डेढ़ वर्ष के बच्चे से लेकर 60 वर्ष की महिला तक शामिल हैं।
प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी
मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में निगरानी और जांच तेज कर दी है। सीएमएचओ पी.एस. मार्को, एसडीएम रामराज सिंह, मलेरिया सुपरवाइजर श्रवण श्रीवास सहित स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर बुखार से पीड़ित लोगों की RDT किट से जांच कर रही हैं। पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों का उपचार शुरू करने के साथ उनके घरों में मच्छरदानियां भी वितरित की जा रही हैं। विभाग का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार जांच, उपचार और निगरानी की जा रही है।
मलेरिया के साथ पीलिया और मौसमी बीमारियों ने बढ़ाई चिंता
इधर, बतौली क्षेत्र में भी मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप की जानकारी सामने आ रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की संख्या बढ़ने की बात कही जा रही है। वहीं, एक ही गांव में तीन से अधिक लोगों के पीलिया की चपेट में आने की सूचना से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
मलेरिया के साथ पीलिया और अन्य मौसमी बीमारियों के मामले सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था और बीमारी की रोकथाम को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों में बीमारी को लेकर दहशत का माहौल है। प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक स्वास्थ्य जांच, जागरूकता अभियान और बीमारियों के कारणों की जांच की मांग भी उठ रही है।
कलेक्टर के मार्गदर्शन में अभियान जारी
सरगुजा जिले में मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाए जाने का दावा किया जा रहा है। कलेक्टर अजीत वसंत के मार्गदर्शन में प्रभावित क्षेत्रों में जांच और उपचार का कार्य जारी होने की बात विभाग की ओर से कही गई है।
हालांकि, मलेरिया के साथ पीलिया और अन्य मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच अब स्वास्थ्य विभाग की जमीनी सक्रियता और निगरानी व्यवस्था पर ग्रामीणों की नजर है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों में समय पर बीमारी की पहचान, संक्रमित मरीजों का पूरा उपचार और मच्छरों के प्रजनन पर प्रभावी रोकथाम की है। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और रोकथाम अभियान की प्रभावशीलता से ही स्थिति पर नियंत्रण की तस्वीर साफ होगी।





