
ABVP की रैली में स्कूली एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों को शामिल किए जाने का आरोप एनएसयूआई ने कलेक्टर को सौंपा तीन पन्नों का ज्ञापन जिला शिक्षा अधिकारी के निलंबन की मांग..
नाबालिग विद्यार्थियों की सुरक्षा,अभिभावकीय सहमति और राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल किए जाने की जांच की मांग 9 बिंदुओं पर कार्यवाही की मांग 7 दिन में कार्यवाही नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
सूरजपुर :– अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा सूरजपुर में आयोजित कार्यक्रम एवं रैली में विद्यालय एवं महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को शामिल किए जाने के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है इस मामले को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन NSUI जिला सूरजपुर ने जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है,
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष आकाश साहू द्वारा सौंपे गए तीन पृष्ठीय ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों जिनमें नाबालिग छात्र-छात्राएं भी शामिल बताए गए हैं उनको 5 अक्टूबर को आयोजित ABVP की कार्यक्रम रैली में शामिल किया गया ज्ञापन में कहा गया है कि विद्यार्थियों को सूरजपुर शहर की सड़कों पर तेज धूप में रैली में शामिल कराया गया जिसे लेकर विद्यार्थियों की सुरक्षा,अभिभावकीय सहमति तथा शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं
एनएसयूआई ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले को केवल एक राजनीतिक विवाद के रूप में न देखकर नाबालिग विद्यार्थियों के अधिकार,सुरक्षा और विद्यालयों की निष्पक्षता से जुड़े विषय के रूप में लिया जाए तथा तथ्यात्मक जांच कराई जाए ज्ञापन में सबसे प्रमुख सवाल यह उठाया गया है कि संबंधित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को उक्त कार्यक्रम में शामिल होने के लिए किसके द्वारा निर्देशित किया गया था एनएसयूआई ने मांग की है कि सभी संबंधित शैक्षणिक संस्थानों के प्राचार्यों से जानकारी ली जाए कि विद्यार्थियों को कार्यक्रम में भेजने का निर्देश किस स्तर से प्राप्त हुआ और इसके लिए किस प्रकार की अनुमति ली गई साथ ही यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि नाबालिग विद्यार्थियों के अभिभावकों से कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति ली गई थी या नहीं यदि अभिभावकों की अनुमति नहीं ली गई थी तो इस संबंध में जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्यवाही की मांग की गई है ज्ञापन में कहा है कि विद्यालय एवं महाविद्यालय विद्यार्थियों को शिक्षा,संस्कार और उनके भविष्य निर्माण के लिए सुरक्षित एवं निष्पक्ष वातावरण उपलब्ध कराने के लिए होते हैं संगठन ने प्रशासन से यह भी जांच कराने की मांग की है कि कहीं विद्यार्थियों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक अथवा संगठनात्मक कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार,भीड़ या शक्ति प्रदर्शन के लिए तो नहीं किया गया ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान विद्यार्थियों को राजनीतिक या संगठनात्मक गतिविधि में शामिल कराने के लिए किसी प्रकार के दबाव,प्रभाव या गलत जानकारी के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए ज्ञापन में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं एनएसयूआई ने प्रशासन से मांग की है कि रैली के दौरान विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी,चिकित्सा सुविधा,विश्राम,छाया एवं सुरक्षा व्यवस्था की क्या व्यवस्था की गई थी इसकी भी जांच की जाए संगठन का कहना है कि यदि कम उम्र के विद्यार्थियों को लंबे समय तक सड़क पर रैली में शामिल किया गया, तो उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी किसकी थी यह भी जांच का विषय होना चाहिए ज्ञापन में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के नियमानुसार विद्यार्थियों की सुरक्षा और अधिकारों से संबंधित दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए जिला प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच करने की मांग की गई है एनएसयूआई ने कहा कि विद्यार्थियों की शिक्षा एवं सुरक्षा किसी भी राजनीतिक या संगठनात्मक गतिविधि से ऊपर है संगठन ने प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि भविष्य में किसी भी विद्यालय अथवा महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं पर किसी राजनीतिक या संगठनात्मक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष दबाव न बनाया जाए एनएसयूआई ने जिला प्रशासन के सामने कुल 9 प्रमुख मांगें रखी हैं इनमें 5 अक्टूबर की रैली में शामिल किए गए विद्यालय एवं महाविद्यालयों तथा विद्यार्थियों की संख्या की विस्तृत जांच,संबंधित प्राचार्यों से पूछताछ,अभिभावकों की सहमति की जानकारी,कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भूमिका,रैली के दौरान सुरक्षा एवं चिकित्सा व्यवस्था की जांच तथा किसी प्रकार के दबाव की पुष्टि होने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग शामिल है संगठन ने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने के बाद जांच के निष्कर्ष और की गई कार्यवाही से विद्यार्थियों,अभिभावकों एवं आम जनता को अवगत कराया जाए ज्ञापन के अंतिम बिंदु में एनएसयूआई ने कहा है कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि विद्यालयीन नाबालिग छात्र-छात्राओं को राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल किया गया था तो इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी की भी जांच की जानी चाहिए एनएसयूआई ने विशेष रूप से जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर की भूमिका एवं जिम्मेदारी की जांच की मांग करते हुए कहा है कि शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और निष्पक्ष शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है एनएसयूआई ने इस विषय पर जांच कर जिला शिक्षा अधिकारी के निलंबन की मांग की है एनएसयूआई जिलाध्यक्ष आकाश साहू ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि 07 दिनों के भीतर आवेदन पर उचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो एनएसयूआई जिला सूरजपुर द्वारा मामले को लेकर आंदोलन किया जाएगा ज्ञापन की प्रतिलिपि आवश्यक कार्यवाही के लिए कुलपति संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा,पुलिस अधीक्षक सूरजपुर,जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर,सहायक आयुक्त आदिवासी विकास सूरजपुर तथा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भी भेजी गई है एनएसयूआई ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाए ताकि भविष्य में विद्यार्थियों को किसी भी राजनीतिक अथवा संगठनात्मक गतिविधि में उनकी इच्छा या आवश्यक अनुमति के बिना शामिल किए जाने की पुनरावृत्ति न हो ज्ञापन के माध्यम से एनएसयूआई ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की शिक्षा,सुरक्षा,गरिमा और अधिकारों से जुड़े इस मामले में संगठन जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग को लेकर आगे भी अपनी आवाज उठाता रहेगा इस दौरान एनएसयूआई प्रदेश सचिव राजेश साहू,मुस्तफा खान, रूद्र प्रताप सिंह,शिवम साहू,यश साहू,दुर्गेश जायसवाल एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



