
सूरजपुर/प्रतापपुर :– वन परिक्षेत्र प्रतापपुर के जंगल में बुधवार को एक बार फिर हाथी के हमले ने इंसानी जिंदगी को दहला दिया। पोड़ी से खाद लेकर अपने गांव सिंघरा लौट रहे 50 वर्षीय रामलाल पिता गनपत, जाति गोड़ को एक दंतैल हाथी ने अचानक हमला कर मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद इलाके में दहशत के साथ ही वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार रामलाल और कन्नीलाल पिता महिता सिंह, दोनों पोड़ी से खाद लेकर बाइक से अपने घर सिंघरा लौट रहे थे। सरहरी और सिंघरा के बीच जंगल के पास अचानक उनका सामना दंतैल हाथी से हो गया। हाथी ने बाइक सवार रामलाल को सूंड से लपेटकर जमीन पर पटक दिया। हमले में रामलाल की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक हादसा इतना भयावह था कि मृतक का सिर शरीर से अलग हो गया और गंभीर चोटों के कारण उसके शरीर के अंदरूनी अंग तक बाहर आ गए।
इधर, बाइक पर सवार कन्नीलाल ने किसी तरह मौके से भागकर अपनी जान बचाई। घटना की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल के आसपास जुटने लगे। देखते ही देखते वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया।
हाथी मित्र दल पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल?..
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी के बावजूद हाथी मित्र दल द्वारा समय पर ग्रामीणों को सूचना नहीं दी जाती। यही वजह है कि लोग जंगल और ग्रामीण मार्गों से गुजरते समय हाथियों के खतरे से अनजान रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते रामलाल और उसके साथी को हाथी की मौजूदगी की जानकारी मिल जाती, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाथी प्रभावित क्षेत्र में लगातार ऐसी घटनाओं के बावजूद वन विभाग की व्यवस्था जमीन पर प्रभावी नजर नहीं आ रही है। सिर्फ हाथियों की निगरानी और कागजी सतर्कता से ग्रामीणों की जान नहीं बचाई जा सकती।
ग्रामीणों का विरोध, वन विभाग से ठोस कार्रवाई की मांग
घटना के बाद सैकड़ों ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों ने मांग की है कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए, हाथियों की लोकेशन की जानकारी तत्काल ग्रामीणों तक पहुंचाई जाए और संवेदनशील मार्गों पर सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर वन विभाग ने समय रहते चेतावनी और निगरानी व्यवस्था को मजबूत नहीं किया तो आने वाले दिनों में और भी लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। ग्रामीणों ने विभाग से केवल घटना के बाद पहुंचने के बजाय घटना से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
रामलाल की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जंगल से लगे गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की तैयारियां आखिर कितनी प्रभावी हैं? अब देखना होगा कि इस दर्दनाक घटना के बाद विभाग ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या मामला कुछ दिनों बाद महज औपचारिकताओं तक सिमटकर रह जाएगा।





