
सूरजपुर/बिश्रामपुर :– सूरजपुर जिला क्षेत्र के ग्राम कुम्द स्थित चाँदसि दवाखाना का स्टिंग ऑपरेशन सामने आए एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। स्टिंग में कथित रूप से इलाज की व्यवस्था, दवा संचालन और आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कैमरे पर सामने आए तथ्यों के बाद भी जांच शुरू नहीं होती, तो आम लोगों की जान और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? आरोप है कि सीएमएचओ डॉ. कपिल पैकरा को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक न तो जांच के आदेश दिए गए और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गई। यदि यह सही है, तो विभागीय निष्क्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या कानून केवल कमजोर लोगों के लिए है? क्या प्रभावशाली लोगों के मामलों में प्रशासन की कार्रवाई ठहर जाती है? सात दिनों की यह खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है। यदि स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए तथ्यों की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो इससे न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की साख पर असर पड़ेगा, बल्कि कानून के समान अनुपालन पर भी सवाल उठेंगे।
अब जिले की जनता जवाब चाहती है—क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? यदि आरोप सही पाए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के शासन, दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।





