
सरगुजा/उदयपुर :– रामगढ़ महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा उदयपुर को नगर पंचायत बनाने की घोषणा के बाद प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है। नगर पंचायत गठन को लेकर क्षेत्र का सर्वेक्षण कार्य शुरू कर दिया गया है, लेकिन इस प्रक्रिया ने अब विवाद का रूप लेना शुरू कर दिया है। प्रस्तावित सीमा में ग्राम उदयपुर के साथ ग्राम सोनतराई के आश्रित ग्राम डूमरडीह को भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
डूमरडीह के ग्रामीणों ने नगर पंचायत में शामिल किए जाने का खुलकर विरोध करते हुए तहसील कार्यालय उदयपुर पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी राय और सहमति लिए बिना गांव को नगर पंचायत की सीमा में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो पूरी तरह अनुचित है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वे वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र की योजनाओं और सुविधाओं से जुड़े हैं। यदि गांव नगर पंचायत में शामिल हो जाता है तो ग्रामीणों को कई सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है। साथ ही टैक्स और अन्य शहरी नियमों का अतिरिक्त बोझ भी उन पर पड़ेगा। उनका कहना है कि जब तक ग्रामसभा की सहमति नहीं ली जाती, तब तक किसी भी प्रकार की सीमा विस्तार की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि डूमरडीह को प्रस्तावित नगर पंचायत क्षेत्र से बाहर रखा जाए। उनका कहना है कि विकास के नाम पर उनकी इच्छा के विरुद्ध कोई निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे जन आंदोलन करने के लिए भी बाध्य होंगे।
उधर, नगर पंचायत गठन को लेकर प्रशासनिक सर्वे जारी है। आने वाले दिनों में शासन स्तर पर प्राप्त आपत्तियों और सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। फिलहाल डूमरडीह के विरोध ने उदयपुर नगर पंचायत गठन की प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि विकास का स्वागत है, लेकिन उनकी सहमति और अधिकारों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।





