
अंबिकापुर :– शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति और उसके कारण फैलते पीलिया के गंभीर संकट ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गौरव पथ स्थित नगर निगम के नए कार्यालय का जोरदार घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नगर निगम और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण शहर के लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। कांग्रेस पदाधिकारियों के बताए मुताबिक लगभग 4 दर्जन से अधिक लोग अस्पताल व घरों में इलाज करा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए कांग्रेस ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
‘षड्यंत्र’ टिप्पणी पर घमासान, महापौर के बयान की आलोचना तेज…
पीलिया फैलने के बाद मंगलवार को महापौर ने प्रभावित वार्डों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने वार्ड की गंदगी पर नाराजगी तो जताई, लेकिन साथ ही यह विवादित बयान भी दिया कि उन्हें स्थानीय पार्षदों ने दूषित पानी की सूचना समय पर नहीं दी थी। महापौर ने इस पूरे मामले में ‘षड्यंत्र’ होने की आशंका जताई थी। कांग्रेस ने महापौर के इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना और अपनी विफलताओं को छिपाने वाला बताया। नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद और जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने कहा कि जब जनता मर रही है, तब प्रशासन जिम्मेदारी लेने के बजाय बहानेबाजी कर रहा है।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जोरदार झड़प: निगम कार्यालय किया प्रवेश का प्रयास…
नगर निगम कार्यालय के घेराव की पूर्व सूचना मिलते ही प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कार्यालय के चारों ओर बेरिकेडिंग की गई थी और भारी पुलिस बल तैनात था। हालांकि, आक्रोशित कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पुलिस के घेरे को चुनौती दी और बेरिकेड गिराकर निगम परिसर के भीतर प्रवेश करने का किया प्रयास। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। परिसर के समीप कांग्रेसियों ने नगर निगम सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन, महापौर के इस्तीफे की मांग
जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा के अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने मामले में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा है। जिसमें नगर पालिक निगम अंबिकापुर पर दूषित पेयजल सप्लाई का आरोप लगाया है। ज्ञापन में कहा गया है कि निगम की लापरवाही से शहर में पीलिया का प्रकोप फैला, जिससे दो लोगों की मौत और कई नागरिक बीमार हुए हैं। महापौर के बयान को असंवेदनशील बताते हुए महापौर व संबंधित एमआईसी सदस्य के इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग की गई है। साथ ही दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच कराने की भी मांग उठाई गई है।





