छत्तीसगढ़सरगुजा

निगम में तीन करोड़ के काम का खुला टेंडर, दो बार पहले हो चुका था निरस्त, बनी नालियों को तोड़कर फिर बनाने का खेल

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अम्बिकापुर :– नगर निगम में बहुप्रतीक्षित तीन करोड़ के 52 कामों की निविदा को अंतत: 9 अक्टूबर को खोल दिया गया जिसमें ठेकेदारों को 23 प्रतिशत कम दर तक कामों की स्वीकृति मिली है वहीं कुछ काम ऐसे भी हैं जिनमें ठेकेदारों ने आपसी सहमति से बंटवारा कर SOR से अधिक दर पर काम पाया है, परन्तु एक ही प्रकृति के कामों को एक ही स्थान पर इतने अधिक अंतर पर कराने वाले अधिकारियों की कार्यशैली पर भी यहां सवाल उठ रहे हैं।    इस पूरी प्रक्रिया में टेंडर (निविदा) जारी होने और फिर कार्य के स्वीकृत होने का सामान्य सा जो काम दिखाई दे रहा है असल में वह निगम में चल रहे भारी भ्रष्टाचार का एक जीवंत उदाहरण। टेंडर की इस प्रक्रिया में नाली निर्माण व सीसी रोड के कई कार्य ऐसे हैं जिसकी वास्तविकता में कोई आवश्यकता ही नहीं थी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण चौपाटी के पास बन रही नाली का कार्य है जिसकी निविदा कुछ समय पूर्व हो चुकी है और यहां पहले से ही सीसी ढलाई वाली नाली बनी हुई थी जिसे जेसीबी की मदद से उखाड़ कर फिर से सीसी नाली ही बनाई जा रही है।    चौपाटी के पास से ठेला हटाने की जो कार्यवाही हुई है जिसे निगम द्वारा आम लोगों को राहत देने वाली कार्यवाही बताकर वाहवाही लूटी जा रही थी, स्थानीय लोगों का कहना है कि वह आम लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए की गई कार्यवाही है, असल में यहां पूर्व में बनी सीसी नाली को तोड़ने के कार्य में यह सब ठेला-गुमटी बाधक बन रहे थे इसलिए यहां से ठेला गुमटी को हटाकर नाली निर्माण का काम को आनन-फानन में पूरा कराने के लिए ठेलों को हटाया गया है ना कि आम लोगों को यातायात की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए। इसे यहां से गुजरते हुए देखा भी जा सकता है स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस नाली को तोड़ा गया है वह काफी अच्छी हालत में थी और उसे दुबारा बनाने की कोई आवश्यकता भी नहीं थी,  क्या यहां सरकारी धन को नाली में बहाने और अपनी जेबों को गर्म करने के लिए बनाया जा रहा है। बस यही हाल इस बार के निविदा में स्वीकृत कार्यों का भी है इसमें भी अच्छी भली नालियों को तोड़ने और उसे फिर से बनाने और पैसा डकारने का पूरा खेल शामिल लग रहा, जबकि सड़कों की हालत किसी से छुपी नहीं है लेकिन कुछ बनी बनाई नाली को तोड़कर फिर से बनाया जा रहा इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं भ्रष्टाचार किस हद तक बड़ चुका है।

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