
अंबिकापुर के महावीर हॉस्पिटल पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आरोप है कि सूरजपुर जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही के बाद 7 वर्षीय मासूम का इलाज बिना सही जांच रिपोर्ट के किया जाता रहा। परिजनों का कहना है कि 45 वर्षीय व्यक्ति की जांच रिपोर्ट को 7 वर्षीय बच्चे की रिपोर्ट बताकर इलाज किया गया।
करीब 19 घंटे तक बच्चे का ICU में उपचार चलता रहा, लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा, अब सवाल उठ रहे हैं कि बिना सही जांच रिपोर्ट के आखिर इलाज कैसे शुरू किया गया और किस आधार पर ICU में भर्ती कर उपचार चलता रहा।
मामला सूरजपुर जिला अस्पताल और अंबिकापुर के महावीर हॉस्पिटल से जुड़ा है। परिजनों का आरोप है कि सूरजपुर जिला अस्पताल ने बड़ी लापरवाही करते हुए 45 वर्षीय व्यक्ति की जांच रिपोर्ट 7 वर्षीय बच्चे के नाम से जारी कर दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बच्चे को महावीर हॉस्पिटल में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। बताया जा रहा है कि करीब 19 घंटे तक ICU में इलाज चलता रहा, लेकिन बच्चे की तबीयत लगातार बिगड़ती गई। इसके बाद उसे दूसरे अस्पताल रेफर किया गया, ।
अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या महावीर हॉस्पिटल ने मरीज की जांच रिपोर्ट और पहचान का सत्यापन किया था? बिना सही रिपोर्ट के आखिर किस बीमारी का इलाज किया जा रहा था? क्या अस्पताल ने अपनी ओर से आवश्यक जांच कराई या केवल उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू कर दिया? इस पूरे मामले में सूरजपुर जिला अस्पताल की कथित लापरवाही के साथ-साथ महावीर हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



