छत्तीसगढ़सरगुजा

धान खरीदी का दबाव या पैसों का? समिति प्रबंधक की संदिग्ध आत्महत्या ने खड़े किए कई सवाल

Spread the love

सरगुजा/सीतापुर :– केरजू सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक दिनेश गुप्ता द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और धान खरीदी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर किन हालातों ने एक जिम्मेदार समिति प्रबंधक को यह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

आखिर किस दबाव में थे दिनेश गुप्ता?

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि धान खरीदी को लेकर लगातार बनाया जा रहा दबाव, लक्ष्य पूर्ति की मजबूरी और संभावित अनियमितताओं की जिम्मेदारी ने प्रबंधक को मानसिक रूप से तोड़ दिया। सवाल यह है कि

० क्या धान खरीदी के नाम पर किसी तरह का प्रशासनिक या राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा था?

० क्या किसी गलती की कीमत अकेले प्रबंधक से चुकाने की तैयारी थी?

रात 1 बजे तक समिति में क्या चल रहा था?

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि दिनेश गुप्ता को देर रात दोबारा समिति कार्यालय क्यों जाना पड़ा?

रात करीब 1 बजे तक समिति में मौजूद रहना और उसके कुछ ही देर बाद आत्महत्या कर लेना, कई आशंकाओं को जन्म देता है।

० क्या कोई नोटिस, फोन कॉल या दबाव भरी बातचीत हुई थी?

० क्या रात के समय कोई लेन-देन या दस्तावेज़ी दबाव बनाया गया?

लेन-देन का मामला — कौन जिम्मेदार?

सूत्रों के अनुसार, पैसों के लेन-देन से जुड़ा मामला भी सामने आ रहा है। यदि यह सही है तो सवाल उठता है कि

० क्या समिति प्रबंधक पर किसी तरह की आर्थिक जवाबदेही या रिकवरी का दबाव डाला जा रहा था?

० क्या सिस्टम की खामियों का सारा बोझ एक कर्मचारी पर डाल दिया गया?

आत्महत्या या सिस्टम की हत्या?

यह महज़ आत्महत्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की असंवेदनशीलता का परिणाम भी हो सकता है। अगर धान खरीदी जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में काम कर रहे अधिकारी/कर्मचारी इस कदर मानसिक दबाव में हैं कि जान दे रहे हैं, तो

० जवाबदेही किसकी तय होगी?

० क्या उच्च अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?

पुलिस जांच पर भी निगाहें

सीतापुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि

० क्या जांच केवल आत्महत्या तक सीमित रहेगी या दबाव बनाने वालों तक भी पहुंचेगी?

० क्या कॉल डिटेल्स, समिति रिकॉर्ड और धान खरीदी से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच होगी?

परिवार न्याय की उम्मीद में :–

दिनेश गुप्ता के परिजन गहरे सदमे में हैं और उन्हें अब निष्पक्ष जांच की उम्मीद है, ताकि यह साफ हो सके कि यह कदम उन्होंने अपनी मर्जी से उठाया या उन्हें परिस्थितियों ने ऐसा करने पर मजबूर किया।

सवाल कायम हैं —

धान खरीदी का दबाव था या किसी घोटाले की परछाईं?

क्या दिनेश गुप्ता अकेले दोषी थे या सिस्टम ने उन्हें बलि का बकरा बना दिया?

जांच पूरी होने के बाद ही सच सामने आएगा, लेकिन फिलहाल यह मामला एक आत्महत्या नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर आरोपपत्र बन चुका है।

Fareed Khan

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Verified by MonsterInsights