
सूरजपुर :– जिले में अवैध जुए का कथित नेटवर्क अब सिर्फ फुसफुसाहट या अफवाह नहीं रहा—यह सीधे-सीधे प्रशासन और कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देता नजर आ रहा है। कुमेली पर्यटन स्थल और आसपास के जंगलों में चल रहे इस कथित खेल को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं।
स्थानीय स्तर पर यहां तक कहा जा रहा है—
“खबर छापते रहें… जुआ न बंद हुआ है, न बंद होगा।”
अगर यह सच है, तो यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवालिया तमाचा है।
शहर से जंगल तक: जुए का ‘रणनीतिक पलायन’
पहले शहर के आसपास चलने वाले जुए के अड्डों पर कभी-कभार पुलिस कार्रवाई होती थी, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, जैसे-जैसे निगरानी बढ़ी, जुआ संचालकों ने अपना ठिकाना बदल लिया—
👉 अब जंगल, सीमावर्ती इलाके और सुनसान जगहें नया अड्डा बन चुके हैं।
कुमेली क्षेत्र और सूरजपुर-कोरिया सीमा के पास का माजा इलाका कथित तौर पर इस नेटवर्क का नया केंद्र बन गया है।
स्थानीय लोग इसे तंज में “जंगल मॉडल” कह रहे हैं—जहां कानून से बचना आसान है और भाग निकलना उससे भी आसान।
4 घंटे में लाखों का खेल: ‘जुआ शिफ्ट सिस्टम’
सूत्र बताते हैं कि यह कोई बिखरा हुआ जुआ नहीं, बल्कि पूरी तरह टाइम-बाउंड ऑपरेशन है—
🕓 शाम 4 बजे से शुरुआत
🕗 रात 8 बजे तक समापन
इन चार घंटों में लाखों रुपये के दांव लगने की चर्चा है।
यह कोई साधारण जुआ नहीं, बल्कि एक संगठित “शिफ्ट सिस्टम” जैसा दिखता है…
‘बुक सिस्टम’ से चलता है नेटवर्क
यह खेल सिर्फ ताश तक सीमित नहीं बताया जा रहा—
👉 दांव “बुक” में दर्ज होते हैं
👉 दूर बैठे लोग भी शामिल होते हैं
👉 हार-जीत का पूरा हिसाब व्यवस्थित रखा जाता है
यानी यह पूरा मामला एक संगठित आर्थिक नेटवर्क जैसा प्रतीत होता है—हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ नाम चर्चा में, पर पुष्टि नहीं:– स्थानीय चर्चाओं में कुछ नाम बार-बार सामने आ रहे हैं—
क्या यही हैं 52 पारियों के मास्टरमाइंड :– कुमेली क्षेत्र में शमशेर, माजा में एस कुमार और अन्य सहयोगियों के सक्रिय होने की बातें कही जा रही हैं?
हालांकि, यह साफ करना जरूरी है कि इन सभी नामों और आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है—लेकिन लगातार उठती चर्चाएं मामले की गंभीरता जरूर बढ़ा रही हैं।
खुलेआम चुनौती: “जुआ बंद नहीं होगा”
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कथित तौर पर जुआ संचालक खुद ही दावे कर रहे हैं—
👉 खबरें छपती हैं,
👉 कुछ दिन शांति रहती है,
👉 फिर सब पहले जैसा शुरू हो जाता है।
अगर यह सच है, तो यह सीधे-सीधे कानून व्यवस्था की कमजोरी की ओर इशारा करता है।
पुलिस और साइबर शाखा पर सवाल
स्थानीय स्तर पर सबसे गंभीर आरोप पुलिस और साइबर शाखा पर लगाए जा रहे हैं।
कुछ लोगों का दावा है कि कथित संरक्षण के बिना इतना बड़ा नेटवर्क संभव नहीं।
हालांकि, इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की बातें पुलिस की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं।
लेन-देन और ‘बंटवारे’ की चर्चा
सूत्रों के अनुसार रोजाना भारी रकम का लेन-देन होता है,
और कथित तौर पर इस पैसे का हिस्सा अलग-अलग स्तरों पर बंटता भी है।
अगर यह सही निकला, तो मामला सिर्फ जुए का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जड़ तक पहुंचने वाला घोटाला बन सकता है।
निष्पक्ष जांच की मांग
अब स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन खुलकर मांग कर रहे हैं—
✔ निष्पक्ष जांच हो
✔ दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
✔ संरक्षण देने वालों को भी बख्शा न जाए
मुश्किल सवाल: क्या सच में रुकेगा ये खेल?
सूरजपुर में जुए का यह कथित “जंगल नेटवर्क” अब सिर्फ कानून का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुका है।
अब सवाल यही है—
👉 क्या यह नेटवर्क खत्म होगा?
👉 या “न बंद हुआ है, न बंद होगा” ही हकीकत बन जाएगा?
फिलहाल, पूरे जिले की नजरें एक ही चीज पर टिकी हैं—
कार्रवाई… या फिर खामोशी?



