
सूरजपुर/प्रतापपुर:– प्रतापपुर विकासखंड के गोविंदपुर ग्राम में स्थित लक्ष्मी विद्या निकेतन स्कूल में शिक्षा व्यवस्था की खस्ता हालत को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। यहां बच्चों को अत्यधिक खराब परिस्थितियों में पढ़ाई करने को मजबूर किया जा रहा है, और इसके बावजूद न तो शिक्षा विभाग और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मामले पर कोई ध्यान दिया है।

इस स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए ना तो उचित व्यवस्था है, और ना ही कोई फर्श है। बच्चों को ज़मीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, और उन्हें तकिया या दर्री तक नहीं दी जाती ताकि वे आराम से बैठ सकें। इन बच्चों के लिए शौचालय की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण उन्हें खुले में शौच करने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार शिक्षा विभाग, स्थानीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर स्थिति से आंखें क्यों मूंदे हुए हैं?

लक्ष्मी विद्या निकेतन स्कूल गोविंदपुर, प्रतापपुर विकासखंड से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है। इस स्कूल में न तो गेट है, और न ही बाउंड्री वाल, जिससे यह बच्चों के लिए बेहद असुरक्षित बन गया है। स्कूल की इमारत मुख्य सड़क से महज पांच मीटर दूर है, और यहां लगातार छोटे-बड़े वाहन चलते रहते हैं। स्कूल के बच्चे अक्सर सड़क पर खेलते हुए नजर आते हैं, जो दुर्घटनाओं के खतरे में रहते हैं। कई बार बच्चों के साथ दुर्घटनाएं होते-होते बची हैं, लेकिन इस पर किसी भी अधिकारी का ध्यान नहीं जाता।
यहां की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय नागरिकों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की स्थिति से शिक्षा विभाग, जनप्रतिनिधि और अधिकारी लगातार अनभिज्ञ बने हुए हैं, जबकि यह उनके कर्तव्य का हिस्सा है कि वे बच्चों के भविष्य के लिए बेहतर वातावरण सुनिश्चित करें। यह स्थिति तब है, जब जिले भर में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।
सवाल यह भी उठता है कि आखिर क्यों शिक्षा विभाग, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस प्रकार के गंभीर मुद्दों पर चुप हैं। क्या यह सब कुछ अधिकारियों की मिलीभगत का परिणाम है? क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने की बात करने वाले नेताओं और अधिकारियों को इस स्थिति पर कोई ध्यान नहीं है?
निर्माणाधीन भवन में कक्षाएं संचालित
वहीं, यह भी खबर सामने आई है कि इस स्कूल में कक्षाएं एक निर्माणाधीन भवन में संचालित हो रही हैं। इस भवन में ना तो बच्चों के लिए उचित और सुरक्षित कक्षाएं हैं, और न ही खेल कूद के लिए कोई व्यवस्थित प्ले ग्राउंड है। बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास भी इस प्रकार की खराब सुविधाओं से बाधित हो रहा है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि इस स्कूल के भविष्य को लेकर प्रशासन और शिक्षा विभाग गंभीर क्यों नहीं हैं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह की स्थिति बनी रही तो यह बच्चों का भविष्य अंधेरे में जाएगा। उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि इस तरह के स्कूलों की हालत जिले के अन्य हिस्सों में भी कमोबेश ऐसी ही है, और यदि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया, तो जिले की शिक्षा व्यवस्था और भी बदतर हो सकती है।
“नया भारत कैसे बनेगा ?”
यह स्थिति इस बात को भी उजागर करती है कि यदि एक छोटे से स्कूल में इस प्रकार की अव्यवस्था और लापरवाही हो सकती है, तो राज्य और देश स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात केवल एक बेमानी बयान बनकर रह जाती है। “क्या इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था से हम नया भारत बना सकते हैं?” यह सवाल आज पूरे देश में उठ रहा है।
आखिरकार, इस सभी परिस्थिति का जिम्मेदार कौन होगा? क्या बच्चों का भविष्य इसी तरह अंधकारमय रहेगा, या फिर कोई ठोस कदम उठाकर इस स्थिति को बदला जाएगा? यह सवाल शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सभी लोगों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, गोविंदपुर के लक्ष्मी विद्या निकेतन स्कूल में बच्चों के साथ हो रहे इस अत्याचार को लेकर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी गंभीर चिंता का विषय है। यदि इसी तरह के हालात बने रहे, तो न केवल बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होगा, बल्कि यह समग्र शिक्षा व्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी साबित हो सकता है। ऐसे में अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए, जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
इस विषय में जिला शिक्षा अधिकारी राम ललित पटेल ने कहा कि मामला अति गंभीर है तत्काल जांच दल भेज कर इसमें मिले जुड़े हुए लोगों पर कार्यवाही की जाएगी। शिक्षा के नियम का पालन नहीं करने पर स्कूल प्रबंधन पर कार्यवाही की जाएगी





