छत्तीसगढ़सूरजपुर

बाल मजदूरी अपराध, बच्चों को स्कूल भेजना है अनिवार्यः कलेक्टर..

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सूरजपुर। कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशन में जिले के विकासखंड भैयाथान में अनुविभागीय अधिकारी श्री सागर सिंह के मार्गदर्शन में राजस्व विभाग से तहसीलदार भैयाथान के नेतृत्व में, राजस्व निरीक्षक, पटवारी, महिला एवं बाल विकास विभाग से बाल संरक्षण इकाई, श्रम विभाग, पुलिस विभाग, चाईल्ड लाईन के संयुक्त दल द्वारा बच्चों से खेत में रोपा लगवाने की शिकायत पर कार्यवाही करते हुए ग्राम कुसमुसी के गांधी चौक एवं ग्राम केवरा चौक पर संयुक्त दल द्वारा तीन पहिया एवं चार पहिया वाहनों का सघन जांच अभियान चलाया गया। जिसमें 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को रोपा लगवाने हेतु ले जाया जा रहा था। उनमें से 27 बच्चियों को संयुक्त दल द्वारा रेस्क्यू कर जिले की बाल कल्याण समिति में प्रस्तुत किया गया।

गौरतलब है कि बरसात का मौसम आते ही सभी किसान अपने-अपने कृषि कार्य में लग जाते है। जिसमें वे खेतों के जुताई टैक्ट्ररों से कराने के पश्चात रोपा कार्य हेतु मजदूरों का सहारा लेते है। परंतु इन मजदूरों में रोपा लगाने के लिए बच्चों का भी उपयोग किया गया है। जो कि बाल श्रम अधिनियम 1986 के तहत गैर कानूनी है। बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का अधिकार 2006 के तहत सभी बच्चों को स्कूल भेजा जाना आवश्यक है। परंतु रोपा कार्य के समय में अधिकतर बच्चे के माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल न भेज कर रोपा कार्य हेतु भेज रहे है। जो कि अनुचित एवं गैर कानूनी है। इस प्रकार का कृत्य बच्चों को छोटी आयु में पैसा कमाने के मनोवृत्ति हेतु ले जाता है। जिससे बच्चा समय से पहले ही रूपये – पैसे कमाने की चाहत में अपनी शिक्षा को समय से पहले ही छोड देते है। शिक्षा से दूर होने के कारण बच्चों के गलत संगत मे पडने की संभावना बढ़ जाती है। शिक्षा बच्चों में अच्छे बुरे की समझ विकसित करने में सहायता करता है। बाल श्रम अधिनियम 1986 के तहत बच्चों को बाल श्रम में नियोजित किये जाने पर 20000 रुपये से 50000 रूपये तक का जुर्माना का प्रावधान है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 संसाधित 2021 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बालकों को बाल श्रम कराना गैरकानूनी है।

      जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री मनोज जायसवाल द्वारा अपील किया गया है कि जन समुदाय, ग्रामीण अपने बच्चों की शिक्षा बाधित कर रोपा लगवाने हेतु खेतों पर ना भेजें। उन्हें शिक्षा से वंचित ना करें। शिक्षा का लय टूटना बच्चों का आत्मविश्वास झुकाने जैसा है। निःशुल्क शिक्षा का अधिकार 2009 के तहत सभी बच्चों को स्कूल जाना अनिवार्य है। बच्चों के स्कूल के समय में कोई अन्य श्रम कार्य नहीं कराया जाना चाहिए।

Fareed Khan

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