
सूरजपुर :– जिले के ग्राम पंचायत कैलाशपुर और राजापुर के बीच घुनघुट्टा नदी पर स्थित बेलसोता नाला की पुलिया का टूटना अब केवल एक निर्माण संबंधी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के जनजीवन, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा संकट बनकर उभरा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया, तो यह मुद्दा बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2003 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इस पुल का निर्माण किया गया था, जो दर्जनों गांवों को मुख्य सड़क और शहर से जोड़ने वाली एक अहम कड़ी थी। लेकिन 23 जुलाई 2025 को हुई भारी बारिश ने इस पुलिया को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसके बाद से ग्रामीणों का संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया है।
बारिश में गांव बन जाते हैं टापू
गर्मी के दिनों में ग्रामीण अस्थायी रास्तों के सहारे आवागमन कर लेते हैं, लेकिन जैसे ही बारिश का मौसम शुरू होता है, तेज बहाव इन रास्तों को बहा ले जाता है। इससे करीब एक दर्जन गांव पूरी तरह कट जाते हैं और हालात टापू जैसे बन जाते हैं।
शिक्षा पर सबसे ज्यादा असर
इस समस्या का सबसे गंभीर असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कैलाशपुर हाई स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राएं बारिश के दौरान स्कूल नहीं पहुंच पाते। कई बच्चे पढ़ाई छोड़ने की कगार पर हैं, जिससे उनका भविष्य खतरे में पड़ता जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित
पुल के अभाव में ग्रामीणों को अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है। आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन
इस गंभीर समस्या को लेकर किसान कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष विमलेश दत्त तिवारी, जिला महामंत्री संजय डोसी, वेद प्रकाश मिश्र, लिली राजवाड़े, जरीना सुल्ताना, अविनाश साहू, निर्मल साहू सहित कई जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशि सिंह की मौजूदगी में कलेक्टर के नाम अपर कलेक्टर जगन्नाथ वर्मा को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में जल्द से जल्द नए पुल के निर्माण की मांग की गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे ग्राम पंचायत तेलईकछार के केनापारा में एनएच-43 को जाम कर उग्र आंदोलन करेंगे।
बेलसोता नाला की यह टूटी पुलिया अब सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन से जुड़ा मुद्दा बन चुकी है। प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि वह समय रहते समाधान निकालकर इस क्षेत्र को फिर से मुख्यधारा से जोड़े।





