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विश्रामपुर में ‘कुर्सी पर कब्जा’! सालों से जमे अधिकारी, ट्रांसफर सिस्टम फेल?

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सवाल सही, सिस्टम मौन—कुछ सवालों के जवाब पर‘अस्पष्ट’ का खेल?

RTI ने खोली पोल—2014 से लेकर आज तक नहीं हिले कई नाम, विभाग पर उठे गंभीर सवाल

सूरजपुर/बिश्रामपुर :– छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के विश्रामपुर कार्यालय से एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मिली जानकारी ने दिखाया है कि कई अधिकारी सालों से एक ही कुर्सी पर ‘जमे’ हुए हैं।

RTI दस्तावेज़ के मुताबिक—

👉🏻 श्री अरुण कुमार वर्मा – 03.07.2014 से पदस्थ (करीब 10 साल!)

👉🏻 श्रीमती राजकुमारी पैंकरा – 31.01.2014 से पदस्थ (10 साल से ज्यादा)

👉🏻 श्री ललित कुमार – 08.10.2018 से पदस्थ

👉🏻 श्री मोहन सिंह – 14.10.2019 से पदस्थ

👉🏻 श्री कैलाश सिंह – 18.02.2020 से पदस्थ

👉🏻 श्री ललित कुमार कुर्रे – 27.10.2022 से पदस्थ

सवाल यह है कि जब सामान्य नियमों के तहत 3 साल में ट्रांसफर होना चाहिए, तो फिर ये अधिकारी 8-10 साल से एक ही जगह कैसे टिके हुए हैं?

विश्वसनीय सूत्रों का कहना है:– अगर इनमें से कुछ बड़े अधिकारियों के संपत्ति की सही से जांच की जाए तो कई पत्ते खुल जाएंगे, जमीन से लेकर अचल संपत्ति के मालिक भी निकल जाएगा और एक ही पद पर कई सालों से बने रहने का निजी स्वार्थ का कारण भी पता चल जाएगा। 

क्या इनके संपति का चांच किया जाएगा?

क्या विभाग में “अपना सिस्टम” चल रहा है?

क्या ट्रांसफर नीति सिर्फ कागजों में ही लागू होती है?

या फिर किसी ‘ऊपर के संरक्षण’ के चलते ये कुर्सियां नहीं हिल रहीं?

इतना ही नहीं, RTI में पूछे गए कई सवालों को “प्रश्न स्पष्ट नहीं” या “कार्यालय से संबंधित नहीं” बताकर टाल दिया गया—जो पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही जगह पर जमे रहने से “नेटवर्क” मजबूत हो जाता है, जिससे सिस्टम प्रभावित हो सकता है।

अब बड़ा सवाल—

👉 क्या शासन इस पर संज्ञान लेगा?

👉 क्या इन अधिकारियों का ट्रांसफर होगा?

👉 या फिर ‘जमे रहो’ की यही परंपरा जारी रहेगी?

यह मामला अब सिर्फ एक दफ्तर का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख का बन चुका है।

Fareed Khan

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