7 करोड़ के धान घोटाले में ‘चूहों’ को किया बदनाम, डीएमओ साहब हुए निलंबित

छत्तीसगढ़ के कवर्धा (कबीरधाम) जिले से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आई है। यहाँ के जिला विपणन अधिकारी (DMO) अभिषेक मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला द्वारा जारी आदेश के बाद की गई है। अभिषेक मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने करोड़ों रुपये के धान घोटाले के मामले में न केवल गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया, बल्कि मीडिया के समक्ष तथ्यहीन और भ्रामक बयानबाजी भी की। इस फैसले के बाद से जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
7 करोड़ रुपए का धान घोटाला? जानिए पूरा मामला
मामले के जड़ें कवर्धा जिले के दो प्रमुख धान संग्रहण केंद्रों, बाजार चारभाठा और बघर्रा से जुड़ी हैं। जांच के दौरान यह पाया गया कि इन केंद्रों से लगभग 26,000 क्विंटल धान गायब है। बाजार मूल्य के हिसाब से इस लापता धान की कीमत 7 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में धान का स्टॉक कम पाया जाना सीधे तौर पर एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा था। जब यह बात सार्वजनिक हुई, तो प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू की, लेकिन असली विवाद तब पैदा हुआ जब इस गबन पर पर्दा डालने की कोशिश की गई
विवादित बयान: “चूहे और कीड़े खा गए 7 करोड़ का धान”
जब मीडिया ने इस भारी किल्लत और लापता धान को लेकर जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा से सवाल पूछे, तो उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने सबको हैरान कर दिया। उन्होंने आधिकारिक तौर पर यह दावा कर दिया कि लापता धान को चूहे और कीड़े खा गए हैं। एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा 26,000 क्विंटल धान (जो कि सैकड़ों ट्रकों के बराबर होता है) के गायब होने का दोष चूहों पर मढ़ना गले से नीचे नहीं उतरा। इस “हास्यास्पद” तर्क ने न केवल विभाग की फजीहत कराई, बल्कि सरकार की छवि पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए।
विपक्षी दलों का हमला और बढ़ता जन आक्रोश…
जैसे ही ‘चूहे द्वारा धान खाने’ का बयान वायरल हुआ, विपक्षी दलों को सरकार को घेरने का एक सुनहरा मौका मिल गया। जिले भर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए और सोशल मीडिया पर प्रशासन की जमकर किरकिरी हुई। विपक्षी नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार को छिपाने का एक भद्दा प्रयास बताया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। करीब दो महीने तक चले इस हंगामे और दबाव के बाद, मार्कफेड प्रबंधन ने अभिषेक मिश्रा के बयान को विभागीय नियमों के विरुद्ध और तथ्यहीन माना, जिसके परिणामस्वरूप अब यह निलंबन की कार्रवाई की गई है।
कलेक्टर की जांच रिपोर्ट ने खोली पोल :–
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कवर्धा कलेक्टर गोपाल वर्मा ने स्वयं संज्ञान लिया था। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इतनी भारी मात्रा में धान का नुकसान प्राकृतिक कारणों या कीटों की वजह से होना असंभव है। जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया कि यह एक ‘शॉर्टेज’ (कमी) का मामला है और पिछले पांच वर्षों की तुलना में इस बार स्टॉक में भारी विसंगति पाई गई है। कलेक्टर की सख्ती के बाद पहले संग्रहण केंद्र के प्रभारियों को निलंबित किया गया था और अब जांच की आंच उच्च अधिकारियों तक पहुँच गई है।
मार्कफेड का कड़ा रुख: अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई–
मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला द्वारा जारी निलंबन आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि अभिषेक मिश्रा ने अनाधिकृत रूप से मीडिया में गलत जानकारी साझा की। आदेश के अनुसार, इस भ्रामक बयानबाजी से न केवल मार्कफेड विभाग की छवि धूमिल हुई, बल्कि जिला प्रशासन की साख को भी गहरा धक्का लगा। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, मामले की विस्तृत जांच जारी है ताकि भ्रष्टाचार की पूरी कड़ी का पर्दाफाश किया जा सके।





