
सूरजपुर के धान मंडी में सरकार, के नियमों को ताख़ में रखकर अवैध वसूली का खेल, देखें वीडियो
सूरजपुर :– आज से ठीक एक दिन पहले सूरजपुर कलेक्टर द्वारा मीटिंग लिया गया था, उसके ठीक दूसरे दिन ही कृषि उपज मंडी सूरजपुर में नियम-कानून पूरी तरह ताक पर रख दिए गए हैं, और मंडी प्रशासन की मिलीभगत से किसानों को दिनदहाड़े लूटा जा रहा है। यहां न सिर्फ धान तौल में खुला खेल चल रहा है, बल्कि हर कदम पर किसानों से अवैध वसूली की जा रही है।
विश्वसनीय सूत्र का कहना है– कुछ वर्ष पहले भी सूरजपुर धान खरीदी प्रभारी मोहन राजवाड़े द्वारा बड़ा घपला भी कर चुका है, लाखों का धान यूंही खपा चुका है जिसका शिकायत भी हुआ था पर कार्यवाही, लीपापोती में चला गया और इस तरह किसानों से लूट जो सबके सामने हो रहा जिसपर शायद ही कार्यवाही हो, सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि इसका पैसा पवार बड़े बड़े मंत्रियों तक पकड़ और पहुंच है, जिसका फायदा आगे भी उठाता रहेगा।
मंत्री के स्पष्ट आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए मंडी समिति द्वारा प्रति बोरी निर्धारित 40 किलो 700 ग्राम की बजाय जबरन 41 किलो 150 ग्राम से लेकर उससे भी अधिक धान भरवाया जा रहा है। यह सीधी-सीधी किसानों की मेहनत और फसल की चोरी है। हैरानी की बात यह है कि धान भरने का जिम्मा मंडी समिति का होने के बावजूद किसान खुद बोरियां भरने को मजबूर हैं, मानो मंडी नहीं बल्कि कोई निजी ठेकेदारी चल रही हो।
किसानों को दी जाने वाली बोरियों के बदले भी खुलेआम नकद वसूली की जा रही है। यहीं नहीं, धान की नमी जांच के लिए लगाए गए नमी मापक यंत्र भी भ्रष्टाचार का जरिया बन चुके हैं, जहां जांच और बिना जांच के बदले पैसे मांगे जा रहे हैं। किसानों से बिना भुगतान के कोई जांच नहीं होती है, और भुगतान हो जाने के बाद जांच न भी होतो धान आगे बढ़ा दिया जाता है।
किसानों की सुविधा के नाम पर बनाए गए विश्राम गृह पर ताला लटका हुआ है, जिससे स्पष्ट होता है कि मंडी प्रशासन किसानों की सहूलियत नहीं बल्कि केवल वसूली में रुचि रखता है। दूर-दराज से आए किसान रात-दिन खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा क्या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं पहले से इन सब पर ध्यान दिया जय,
क्या किसान यूहीं बेबस और असहाय, मजबूर होकर धान बेचे
क्या यह पूरा खेल संरक्षण में चल रहा है?
जब संबंधित अधिकारी को इस लूट का सूचना मिला तब मौके में पहुंचे तहसीलदार सूर्यकांत साय और उनकी टीम द्वारा जांच कर पंचनामा बनाया गया।
अब देखने वाली बात यह है कि इतने सबूतों के होते हुए क्या बड़ी कार्यवाही होती है कि….
किसानों ने इस अवैध वसूली और वजन घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे।





